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पट्टन घराने के जंगबाज योद्धा ठाकुर फौजख़ान यदुवंशी

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ _____________________________________ पट्टन घराने के जंगबाज योद्धा ठाकुर फौजख़ान यदुवंशी ----------------------------------- यदुकुल में एक से बढ़कर एक जांगबाज योद्धाओं और राजे रजवाड़ों ने जन्म लिया जिन्होंने मां भारती के स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया । आज जिन शूरमा की बात कर रहे हैं वे है बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा ( मधयप्रदेश) की धरती विदिशा के पट्टन के पुलैया गोत्रिय यदुवंशी क्षत्रिय घराने के वीर सपूत श्री श्री ठाकुर फौज़खान सिंह हैं जो ताउम्र हथियारबंद रहे।  इनके बारे में फिलहाल बहुत ज़्यादा जानकारी तो नहीं हमारे पास लेकिन इनके माध्यम से हम आज कई ऐतिहासिक चीज़ों पर प्रकाश डालेंगे। ------------------- महाराजा प्रहलाद सिंह की वीर नस्ल पुलैया मध्य प्रदेश के शिवपुरी,विदिशा तक माइग्रेट कर गये और वहाँ पर कई जागीरों को स्थापित किया जिसमे सेमरी , खडोर, रामगढ़,थाना,नहरयाई,पट्टन, सहजाखेड़ी , दुनातर घराने आदि प्रमुख हैं। ---------------------------- महाराजा प्रहलाद सिंह के पीढ़ी में जन्मे नहरयाई जागीरदारी घराने के ...

एतवार राय स्वर्गीय ठाकुर श्री रघुराज प्रताप सिंह जू

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ _____________________________________ एतवार राय स्वर्गीय ठाकुर श्री रघुराज प्रताप सिंह जू छत्तरपुर (मध्यप्रदेश) की जानी मानी शख्सियत हैं। इनका घराना जाना माना जागीरदार घराना है जिसका अलग ही रुतबा रहा है तथा बुंदेला रियासत बिजावर में इस घराने को "एतवार-राय" की पदवी थी।    ये सूबे से जाने माने स्वतंत्रता सेनानी भी रहे तथा 92 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया ।  इनके पुत्र कुँवर श्री विरेन्द्र सिंह जू यहाँ के सर्वप्रथम जिला न्यायाधीश थे।  इस घराने के गोत्र आदि की ज़्यादा जानकारी नहीं है हमारे पास।  हमारी ये जानने की इच्छा है कि ये "एतवार राय " का आखिर अर्थ क्या है ।  यदि कोई आदरणीय छत्तरपुर सूबे से हो तो कृप्या इस घराने की पूरी जानकारी देने की तकल्ल्फ़ करें।  ------------------ शत शत नमन स्वर्गीय ठाकुर श्री रघुराज प्रताप सिंह जू को।  ------------------- By : श्री बलभद्र कुल अवंतस दाऊ यादव वंश खाप पंचायत समिति बुन्देलखण्ड https://dauyadav.blogspot.com/?m=1 जय मां विंध्यवासिनी जय श्री कुल गुरु गर...

ठाकुर रणजीत सिंह जू यदुवंशी-सेहजाखेड़ी- रामगढ़

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बुन्देलखण्ड अहीरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ____________________________________ सेहजाखेड़ी- रामगढ़ के ठाकुर रणजीत सिंह जू यदुवंशी - -------------------- बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा(मध्यप्रदेश) में स्थित है पुलैया गोत्रीय यदुवंशी क्षत्रियों की प्रतिष्ठित सेहजाखेड़ी जागीर जिसके आखिरी सबसे प्रभावशाली ज़ोरावर जागीरदारों में से एक हुआ करते थे स्वर्गीय ठाकुर रणजीत सिंह जू यादव।  पुलैया क्षत्रप राजवंश का वैसे मुख्य घराना पट्टन रहा है लेकिन कालांतर में इस घराने के वंशजो के भिन्न भिन्न स्थानों पर आबाद होने के कारण ये कई छोटी छोटी जागीरों में बंटा जैसे सहजाखेड़ी जागीरदारी आदि।  बंटवारे के पश्चात स्वर्गीय ठाकुर हैवत सिंह जू यदुवंशी ने 12 गांव की सेहजाखेड़ी जागीर बसाई।  बाय नदी के तट पर सेहजाखेड़ी में पुलैया यदुवंशी ठाकुरों ने नई गढ़ी का निर्माण करवाया जो तकरीबन 15 बीघा क्षेत्र में फैली हुई थी।  ये भव्य गढ़ी बाय नदी में आई भयंकर बाढ़ में नष्ट हो गई थी। आज भी उसके अवशेष मिलते है।  सहजाखेड़ी जागीरदारी का संचालन रामगढ़ से होता था।   देश आजाद होने तक इस जागी...

यदुवंशियों का धौवीखेड़ा ठिकाना (विदिशा)-

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों गढ़ ________________________ धौवीखेड़ा यदुवंशी ठिकाना (विदिशा)- ---------------------- बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा ( मध्यप्रदेश) के विदिशा में आबाद है यदुवंशी ठाकुरों की पुलैया गोत्र जिसमें एक से बढ़कर एक जंगबाज योद्धा और राजा महाराजा हुए। चारण-भाटों एवं इतिहास की तारीख़ों के अनुसार पुलैया गोत्रीय यदुवंशी क्षत्रियों का ख़ानदानी सिलसिला शुरू होता है मथुरा नरेश महाराजा प्रहलाद सिंह यदुवंशी से। --------------------- महाराजा प्रहलाद सिंह की वीर नस्ल पुलैया मध्य प्रदेश के शिवपुरी,विदिशा तक माइग्रेट कर गये और वहाँ पर कई जागीरों और ठिकानों को स्थापित किया जिसमे सेमरी , खडोर, रामगढ़,थाना,नहरयाई,पट्टन, सहजाखेड़ी , दुनातर घराना, धौविखेड़ा ठिकाना आदि प्रमुख हैं। ---------------------------- इन्हीं ठिकानों में से एक प्रसिद्ध ठिकाना है धौवीखेड़ा जागीर का। श्री कृष्ण की ही पीढ़ियों में जन्मे धौवीखेड़ा के स्वर्गीय शूरवीर ठाकुर साहब घोड़ों के बहुत ही शौकीन थे। ये अपनी शूरवीरता , दानवीरता और न्याय प्रियता के लिए प्रसिद्ध थे और जनता इन्हें पूजती...

रणबंका 108 श्री श्री ठाकुर दलेल सिंह जू यदुवंशी

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ //////////////////////// रणबंका 108 श्री श्री ठाकुर दलेल सिंह जू यदुवंशी- ---------------------------------- इन दुर्लभ चित्रों में अश्व पर भाला लिए सवार और बिना शीश के जो शौर्यवान इतिहास पुरुष दिखाई पड़ रहे हैं वे वीर नस्ल पुलैया गोत्रीय यदुवंशी क्षत्रियों की प्रतिष्ठित पट्टन घराने के सबसे ज़ोरावर शासकों में से एक हुआ करते थे । ------------------------------ पट्टन के राजा धुंधसाय के जेष्ठ पुत्र ठाकुर लाल सिंह ( थाना जागीर के जागीरदार) के वीर पुत्र ठाकुर श्री केसरी सिंह यादव के घर ही लगभग 1750 में ठाकुर दलेल उर्फ दिलेर सिंह का जन्म हुआ। -------------- प्रतापी ठाकुर दलेल सिंह का व्यक्तित्व काफ़ी आकर्षक था - इनका भीमकाय कद सात फीट, फौलादी चौड़ी छाती, रौबदार मूछें, सूर्य की भांति दमकता मुख एवम बुलंद आवाज़ इनके व्यक्तित्व में चार चाँद लगाते थे । ये इतने शूरवीर थे की 50 किलो की सांग हमेशा इनके बाएं भुजा में रहती और आपका भीमकाय शरीर दुश्मनों में हमेशा दहशत भर दिया करता था । आपके नाम से ही दुश्मन सेना में खलबली मच जाया करती थी । आपने अ...

यदुवंशी क्षत्रियों की मोहनपुरा जमींदारी

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ यदुवंशी क्षत्रियों की मोहनपुरा जमींदारी ____________________________________ बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा क्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण और  श्री बलराम जी के वंशजो के बहुत से गोत्रो के घराने ओर ठिकाने आवाद है उनमें से ही एक ठिकाना है मोज्जा गोत्र का मोहनपुरा जमींदारी। मोज्जा गोत्र का निकास मथुरा से है | //////////////////////////////// मथुरा से बिस्थापित होकर राजस्थान के रास्ते मालवा होते हुए नरवर क्षेत्र बुन्देलखण्ड में जमींदारी स्थापित की वहां बस गए। एक बार नरवर क्षेत्र में अकाल पड़ गया तो वहां से फिर बिस्थापित    होना पड़ा और वहां से बिस्थापित होकर ओरछा राज्य में आकर बसे और मोहनपुरा ठिकाना आवाद किया। मोहनपुरा जमींदारी निवाड़ी जिला मध्य प्रदेश में स्थित है ---------------------------------------------- मोहनपुरा जमींदारी एक छोटी परन्तु एक सम्पन्न और प्रतिष्ठित जमींदारी रही है देश आजाद होने के बाद भी इस घराने की प्रसिद्धि पूरे सूबे में ख्यात है। ___________________________________ इस घराने के एक बहुत ही प्रसिद...

यादवों की ममरोनी जागीर

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़🚩🚩 """""""""""""""""""""""" दाऊजू यादवों की ममरोनी जागीर⚔️ ____________ बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण बलराम दाऊ जू के वंशज‌ यदुवंशी ठाकुरों के बहुत से ठिकाने आवाद है उनमें से ही एक जागीर है ममरोनी जागीर।इस घराने के ठाकुरों की प्रसिद्धि पूरे सूबे में आजादी के बाद भी आज तक ख्यात रही है। 🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶🔶 बीर भूमि बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा के मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में खनियांधाना तहसील में स्थित है ममरोनी जागीर एक प्रतिष्ठित जागीर रही है । इस घराने के पूर्वजों का निकास मथुरा से है। मथुरा से बिस्थापित होकर राजस्थान के रास्ते मालवा होते हुए इस क्षेत्र में आकर बसे और एक प्रसिद्ध जागीर स्थापित की इस घराने का गोत्र रौतेले‌ है। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️  इसी ‌खानदान में आगे चलकर एक प्रसिद्ध जाग...

बजरंगगढ़ का दुर्ग किला महाराजा जय नारायण सिंह यादव

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ _______________________________ बजरंग गढ़ का किला जहां आज भी मौजूद है अनमोल पारस पत्थर:  (यदुवंशियों और अग्निवंशियो के रक्तरंजित इतिहास का साक्षी)   --------------------------------------- दुर्गो की धरा कहे जाने वाले बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा (मध्यप्रदेश) के प्रसिद्ध दुर्गों में से एक है बजरंगगढ़ का दुर्ग । गुना जिले में मौजूद बजरंग गढ़ का निर्माण 15 से 16वीं सदि के मध्य गगरोन रियासत के यदुवंशी क्षत्रिय शासक महाराजा जय नारायण सिंह ने अपने शासन के दौरान करवाया था। गगरोन राजवंश का गोत्र बैरगनिया है। ---------- बैरगानिया गोत्र अलवर, जयपुर से माइग्रेट कर मथुरा और फिर मध्यप्रदेश के गुना जिले में आए और 300 गाँव की रियासत स्थापित करी। ---------------- महाराजा जय नारायण सिंह ने यहां शासन के दौरान बजरंगगढ़ किले में तोपखाना , रंग महल , मोती महल का निर्माण किया।  साथ ही महाराजा ने यहां अपने कुलदेवता भगवान श्री कृष्ण का मंदिर, अपने राजवंश के रक्षक बजरंग बली का मंदिर तथा अपनी कुलदेवी माँ बीसभुजा माता के मंदिर का निर्मा...

यदुवंशी क्षत्रपों- राणाओं द्वारा स्थापित अहिरवाड़ा राज्य (बुन्देलखण्ड):- राणा रुद्रमूर्ति द्वारा स्थापित

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यदुवंशी क्षत्रपों- राणाओं द्वारा स्थापित अहिरावड़ा राज्य (बुन्देलखण्ड):- अहिरवाड़ा मध्य भारत या आधुनिक मध्य प्रदेश में पार्वती और बेतवा नदियों के बीच स्थित एक ऐतिहासिक क्षेत्र है। अहिरवाड़ा राज्य भिलसा और झांसी शहरों के बीच स्थित था। यदुवंशी आभीर क्षत्रप( यादव)अक्सर सौराष्ट्र के क्षत्रप शिलालेख में उल्लेखित होते रहे हैं जिनहोंने मथुरा, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक समेत समस्त भारत पर राज किया था। बाद की तारीख में इन्होंने बुन्देलखण्ड मध्य प्रदेश में अहिरवाड़ा की नींव रखी।  औरंगजेब के शासनकाल में, अहिरवाड़ा कुछ समय के लिए खींची राजपूत वंश के राजा धीरज सिंह के शासन के अधीन आ गया, जो ज्यादातर समय के लिए यदुवंशी आक्रमण को रोकने में ही व्यस्त रहा। ऐतिहासिक रूप से, बाटक नगर (अहरोरा) व अहिरवाड़ा यदुवंशी राणाओं द्वारा स्थापित किए गए थे। राजा राणा रुद्रमूर्ति सिंह अभीर यहाँ के राजा हुआ करते थे तथा उसके बाद माधुरीपुत्र, ईश्वरसेन व शिवदत्त आदि मशहूर अभीर राजा हुये इनमें से कुछ कालांतर में राजपूत जाति में मिलते गए। ________________________________________________ राजा पूरन...

राजा चूरामन सिंह यदुवंशी

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ______________________________ राजा चूरामन सिंह यदुवंशी -------------------------------- राजा चुरामन सिंह अभिर गोंड गैरीसन के एक कमांडर थे जो बाद में आधुनिक बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा ( मध्य प्रदेश )के जबलपुर जिले में कैमोर के पास 22 गाँवों के एक रियासत स्थापित की और राजा की उपाधि भी धारण की। यह संपत्ति उन्हें गढ़ मंडला के राजा नारिन सा द्वारा सोपी गई थी। नरेंद्र शाह (नारिन सा) के गोंड शासन के दौरान, कटंगी एक सेना की चौकी थी, जहाँ चुरामन सिंह सेनापति थे। चुरामन सिंह की वीरता देख उन्हें जबलपुर में कैमोर के पास 22 गाँव दिए गए थे। 1722 में चूरामन ने अपने बेटे हमीर देव सिंह को यहां का राजा स्थापित किया। बाद में, देवरी (सागर) तक के क्षेत्र चूरामन सिंह के प्रभाव में आ गए, जिस पर उन्होंने 1731 तक शासन किया।  नरेंद्र शाह ने 1731 में राजा चूरामन से देवरी को वापस देने की मांग भी की थी। By: श्री बलभद्र कुल अवंतस दाऊ यादव वंश खाप पंचायत समिति बुन्देलखण्ड जय मां भवानी जय श्री कुल गुरु गर्गाचार्य जय श्री कृष्णा जय श्री बलराम ✍️क्षत्रिय अंकित ...

तिलैथा स्टेट ( जागीर ) झांसी जिला उत्तर प्रदेश में स्थित है - राजा ठाकुर श्री हरप्रसाद सिंह दाऊजू( १८८१-१९४२)

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ____________________________________ बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा क्षेत्र में भगवान बलराम जी के वंशजो के बहुत से गोत्रो के घराने ओर ठिकाने आवाद है उनमें से ही एक ठिकाना है पचैरया गोत्र का तिलैथा का घराना। पचैरया गोत्र का निकास मथुरा से भगवान बलदाऊ महाराज के एक पुत्र से है । //////////////////////////////// मथुरा से बिस्थापित होकर राजस्थान के रास्ते मालवा होते हुए इस क्षेत्र में आकर पचेरिया घराने के पूर्वजों ने तलवार की धाक पर इस क्षेत्र पर जागीर स्थापित की ओर इस क्षेत्र पर शासन किया। तिलैथा स्टेट ( जागीर ) झांसी जिला उत्तर प्रदेश में स्थित है ---------------------------------------------- तिलैथा स्टेट एक छोटी परन्तु एक सम्पन्न और प्रतिष्ठित जागीर (रियासत) रही है देश आजाद होने के बाद भी इस राजघराने की प्रसिद्धि पूरे सूबे में ख्यात है और आज भी इस राजघराने को वहां के लोग आज भी अपना राजा मानते हैं। ___________________________________ इस घराने के एक बहुत ही प्रसिद्ध शासक रहे हैं जिन्होंने अपन...

यदुकुल चंद्र सवाईं महाराज दाऊ श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जूदेव:

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ____________________________________ यदुकुल चंद्र सवाईं महाराज दाऊ श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जूदेव: तस्वीर में आप हैं बलदाऊ वंशी यादव क्षत्रियों की प्रमुख गद्दी बुंदेलखंड के प्रतिष्ठित नैगुवा रेबई प्रिंसली स्टेट के स्वर्गीय महाराजा सवाईं बहादुर विश्वानाथ प्रताप सिंह जूदेव।  1839 में पितामहाराज सवाई महाराजा जगत सिंह जूदेव के बैकुंठ सिधारने के पश्चात आपकी माताश्री और "बुंदेलखंड की रजिया सुल्ताना" महारानी ठकुराइन दुलैया बाई ने 12 वर्षों तक एक कुशल प्रशासिका के तौर पर राजघराने की सत्ता संभाली । तदपश्चात 1851 में आपको रियासत के सरदारों, रियाया और पुरोहितों की मौजूदगी में नैगुवा राजगद्दी पर नशीन किया गया। पूर्वजों से विरासत में मिली बहादुरी और निष्ठा से आपने शासन किया और एक जनप्रिय शासक सिद्ध हुए।  सूबे में काफी कार्य करवाया जिसके लिए आप आज भी जनमानस में याद किए जाते हैं।  आपके पश्चात आपके सुपुत्र और युवराज, सवाई महाराजा रतन सिंह जूदेव यहां के शासक हुए।   Warm Regards to : Naiguwan Royal Family and Kunwar Rajat Si...