बजरंगगढ़ का दुर्ग किला महाराजा जय नारायण सिंह यादव

बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़
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बजरंग गढ़ का किला जहां आज भी मौजूद है अनमोल पारस पत्थर:
 (यदुवंशियों और अग्निवंशियो के रक्तरंजित इतिहास का साक्षी)
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दुर्गो की धरा कहे जाने वाले बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा (मध्यप्रदेश) के प्रसिद्ध दुर्गों में से एक है बजरंगगढ़ का दुर्ग ।

गुना जिले में मौजूद बजरंग गढ़ का निर्माण 15 से 16वीं सदि के मध्य गगरोन रियासत के यदुवंशी क्षत्रिय शासक महाराजा जय नारायण सिंह ने अपने शासन के दौरान करवाया था।

गगरोन राजवंश का गोत्र बैरगनिया है।

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बैरगानिया गोत्र अलवर, जयपुर से माइग्रेट कर मथुरा और फिर मध्यप्रदेश के गुना जिले में आए और 300 गाँव की रियासत स्थापित करी।
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महाराजा जय नारायण सिंह ने यहां शासन के दौरान बजरंगगढ़ किले में तोपखाना , रंग महल , मोती महल का निर्माण किया। 

साथ ही महाराजा ने यहां अपने कुलदेवता भगवान श्री कृष्ण का मंदिर, अपने राजवंश के रक्षक बजरंग बली का मंदिर तथा अपनी कुलदेवी माँ बीसभुजा माता के मंदिर का निर्माण करवाया।

कहते हैं कि जो बजरंग बली की चमत्कारी मूर्ति थी उस मूर्ति में साक्षात भगवान हनुमान जी वास करते थे तथा यहां के ओजस्वी राजा को दर्शन भी देते थे। 

किला परिसर में स्थ्ति तोरण पर लिखे बीजक के अनुसार १७७५ में तोपों का निर्माण अष्टढ धातू से कराया गया था 

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राज्य की समृद्धि के चर्चे दूर दूर तक बढ़ने लगे। 

उन दिनों राघोगढ़ के अग्निवंशी खिच्चियों और गगरोन के चंद्रवंशी क्षत्रियों के बीच कई बार रक्तरंजित युद्ध हुए जिसमें हर बार खिच्चियों को यदुवंशियों के हाथों मूँह की खानी पड़ी। 

इस शत्रुता का कारण गागरोन नरेशों के पास अनमोल पारस पत्थर का होना है।

पारस पत्थर का ज़िक्र महाभारत में भी मिलता है। 

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इसी पत्थर को पाने की लालसा में राघोगढ़ के खिच्चियों ने मुगलों से मिलकर एक बार रात के अंधेरे में दुर्ग पर हमला कर दिया। 

नज़ाकत को भांप यहां के तदकालीन राजा ने अपने पूर्वजों की अनमोल विरासत को यहीं किले के पास एक बड़े सरोवर में सुरक्षित रखवा दिया था। 

इसके बाद भी कई बार दुर्ग के लिए खिच्चियों और अहीरों में संघर्ष हुए।

कॉग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह इसी राघोगढ़ घराने से ताल्लुक रखते हैं।

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बजरंगढ़ किले पर हमला होने के बाद गागरोन राजवंश के लोग बजरंग गढ से 20 किलोमीटर दूर पगारा और चंदौल नामक जगह पर महल बनाकर रहने लगे ।

आगे चल गगरोन घराने के ही वारिस ठाकुर गोपाल सिंह यादव ने यहां अपने नाम पर गोपालपुर और खरौना ठिकाने आबाद किए।

गगरोन घराने के के वहाँ के रघुवंशी राजपरिवार से अच्छे संबंध थे एवं रघुवंशी घराने में बहन बनाकर राखी बंधवाने पर पगारे का किला रघुवंशियों को भेट मे दिया ।

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गगरोन घराने के हालिया जीवंत वंशजों में से एक ठाकुर श्री धर्मेन्द्र सिंह यादव साहब जी को कोटि कोटि धन्यवाद जिन्होंने इस अति दुर्लभ इतिहास से रूबरू करवाया।

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Presentation by: श्री बलभद्र कुल अवंतस दाऊ यादव वंश खाप पंचायत समिति बुन्देलखण्ड

जय मां भवानी
जय श्री कुल गुरु गर्गाचार्य
जय श्री कृष्णा
जय श्री बलराम
✍️क्षत्रिय अंकित यदुवंशी & दाऊ साहब

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