यदुवंशी क्षत्रियों की मोहनपुरा जमींदारी
बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़
यदुवंशी क्षत्रियों की मोहनपुरा जमींदारी
बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा क्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण और
श्री बलराम जी के वंशजो के बहुत से गोत्रो के घराने ओर ठिकाने आवाद है उनमें से ही एक ठिकाना है मोज्जा गोत्र का मोहनपुरा जमींदारी। मोज्जा गोत्र का निकास मथुरा से है |
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मथुरा से बिस्थापित होकर राजस्थान के रास्ते मालवा होते हुए नरवर क्षेत्र बुन्देलखण्ड में जमींदारी स्थापित की वहां बस गए। एक बार
नरवर क्षेत्र में अकाल पड़ गया तो वहां से फिर बिस्थापित
मोहनपुरा जमींदारी निवाड़ी जिला मध्य प्रदेश में स्थित है
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मोहनपुरा जमींदारी एक छोटी परन्तु एक सम्पन्न और प्रतिष्ठित जमींदारी रही है देश आजाद होने के बाद भी इस घराने की प्रसिद्धि पूरे सूबे में ख्यात है।
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इस घराने के एक बहुत ही प्रसिद्ध जमींदार रहे हैं जिन्होंने अपने पूर्वजों की यश और कीर्ति को बढ़ाया जिनका नाम है
ठाकुर पारीक्षत सिंह दाऊ जू(राजा साहब)
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ठाकुर पारीक्षत सिंह दाऊजू यहां के प्रसिद्ध जमींदार रहे हैं ओरछा रियासत के सम्मानित सरदार थे ।
इनके क्षेत्र में एक कहानी बहुत प्रचलित है ओरछा के उग्र स्वभाव के सरदारों को सबग सिखाया मोहनपुरा के ठाकुरों ने।
१.एक बार ओरछा रियासत के कुछ सरदार इनके जमींदारी क्षेत्र से निकल रहे थे तो रास्ते में लोगों को परेशान करते हुए जा रहे थे तो इसकी शिकायत जब पारीक्षत सिंह जू से गई तो उन्होंने मौका की नजाकत देखते हुए तुरन्त अपने चारों पुत्रों को बुलाया जिनके नाम हैं
ठाकुर पन्नालाल सिंह
ठाकुर बैजनाथ सिंह
ठाकुर राम सिंह
ठाकुर मान सिंह
और पारीक्षत सिंह जू ने अपने चारों पुत्रों को इन सरदारों को सबग सिखाने के लिए भेज दिया।
इनके चारों पुत्रों ने अच्छा रणकौशल दिखाया और सरदारों को छण भर में धूल चटा दी और सरदारों को अच्छा सबग सिखाया और अपने क्षेत्र से खदेड़ दिया।
२.एक बार ओरछा रियासत में किसी को फांसी होने वाली थी जिसको फांसी होने वाली थी उसके घर वालों ने सभी सरदारों से मदद मांगी पर किसी ने सजा माफ न करा पाई लेकिन उन्हीं सरदारों में से किसी एक सरदार ने उन लोगों को बताया कि एक ही जगह के सरदार आप लोगों की मदद कर सकते हैं उस सरदार ने बताया कि मोहनपुरा ठाकुरों के अलावा आपकी कोई मदद नहीं कर सकता।
तो बो लोग तुरंत मोहनपुरा पहुंचे और पारीक्षत सिंह जू से मदद के लिए कहा तो पारीक्षत सिंह जू ने अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए मदद के लिए तुरंत हां कर दी और पारीक्षत सिंह जू ओरछा रियासत पहुंचे और राजा साहब से सजा माफ के लिए कहा राजा साहब मान गए और उस फांसी बाले ब्यक्ति की सजा माफ कर दी।
३.ठाकुर पारीक्षत सिंह जू न्याय प्रिय और अन्याय करने वालों के लिए बहुत सख्त थे एक बार इनके क्षेत्र में एक डकैत का आतंक बहुत बढ़ गया इसकी सूचना जब ठाकुर साहब पारीक्षत सिंह जू को दी गई तो उन्होंने अपने चारों बीर पुत्रों को डकैत पकड़ने को भेज दिया उनके पुत्र उस डकैत को पकड़ लाये और ठाकुर साहब के सामने पेश कर दिया ठाकुर श्री ने उस डकैत को जिन्दा जलाने का आदेश दे दिया और उसको जिन्दा जला दिया गया।
ठाकुर पारीक्षत सिंह जू ने अपने जीवन काल में बहुत से ऐसे सराहनीय कार्य किये जिसका बखान इनके क्षेत्र की जनता आज भी करती है इनके बाद इनके पुत्र को जमींदार की गद्दी पर बिठाया गया जिनका नाम है
ठाकुर पन्नालाल सिंह दाऊजू
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ठाकुर पन्नालाल सिंह जू अपने पिता के ही भांति न्याय प्रिय थे और अपने क्षेत्र में विख्यात थे।
मोहनपुरा जमींदारी के कुछ जमींदारों के नाम
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ठाकुर मुकुन्द सिंह दाऊजू"
ठाकुर पारीक्षत सिंह दाऊजू(राजा साहब)"
ठाकुर पन्नालाल सिंह दाऊजू"
ठाकुर फारस राम सिंह दाऊजू"
कुंवर राममनोहर सिंह दाऊजू"
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सविनय धन्यवाद: कुंवर राजा सिंह दाऊजू
By: श्री बलभद्र कुल अवंतस दाऊ यादव वंश खाप पंचायत समिति बुन्देलखण्ड
जय मां विंध्यवासिनी
जय श्री कुल गुरु गर्गाचार्य
जय श्री कृष्णा
जय श्री दाऊ बलराम
✍️क्षत्रिय अंकित यदुवंशी"दाऊ साहब" & कुंवर अभिमन्यु सिंह दाऊजू
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