ठाकुर रणजीत सिंह जू यदुवंशी-सेहजाखेड़ी- रामगढ़

बुन्देलखण्ड अहीरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़
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सेहजाखेड़ी- रामगढ़ के ठाकुर रणजीत सिंह जू यदुवंशी-
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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा(मध्यप्रदेश) में स्थित है पुलैया गोत्रीय यदुवंशी क्षत्रियों की प्रतिष्ठित सेहजाखेड़ी जागीर जिसके आखिरी सबसे प्रभावशाली ज़ोरावर जागीरदारों में से एक हुआ करते थे स्वर्गीय ठाकुर रणजीत सिंह जू यादव। 

पुलैया क्षत्रप राजवंश का वैसे मुख्य घराना पट्टन रहा है लेकिन कालांतर में इस घराने के वंशजो के भिन्न भिन्न स्थानों पर आबाद होने के कारण ये कई छोटी छोटी जागीरों में बंटा जैसे सहजाखेड़ी जागीरदारी आदि। 

बंटवारे के पश्चात स्वर्गीय ठाकुर हैवत सिंह जू यदुवंशी ने 12 गांव की सेहजाखेड़ी जागीर बसाई। 

बाय नदी के तट पर सेहजाखेड़ी में पुलैया यदुवंशी ठाकुरों ने नई गढ़ी का निर्माण करवाया जो तकरीबन 15 बीघा क्षेत्र में फैली हुई थी। 

ये भव्य गढ़ी बाय नदी में आई भयंकर बाढ़ में नष्ट हो गई थी। आज भी उसके अवशेष मिलते है। 

सहजाखेड़ी जागीरदारी का संचालन रामगढ़ से होता था। 

 देश आजाद होने तक इस जागीरदार घराने के वंशजों के पास सोने के घिसाना थे जिनके पीकदान चांदी के थे। चांदी मूठ लगी आला तलवारें, स्वर्ण दीप दिवाली के आदि जो इसके सम्पन्नता की दास्तां बयां करते हैं।।

सहजाखेड़ी-रामगढ़ जागीरदारी के जोरावर जागीरदारों के नाम-

 ठाकुर श्री हैवत सिंह जू (संस्थापक), 
 ठाकुर श्री हरनाथ सिंह जू यादव, 
 ठाकुर श्री मोती सिंह जू, 
ठाकुर श्री निर्भय सिंहजू,
 ठाकुर श्री खुमान सिंह जू यादव,
 ठाकुर श्री रणजीत सिंह जू, 
ठाकुर श्री हरीसिंह जू ------------------

आज बात करेंगे इस घराने के आखिरी सबसे प्रभावशाली और शूरवीर जागीरदार ठाकुर श्री रणजीत सिंह जू की। 

सेहजाखेड़ी रामगढ़ के प्रभावशाली जागीरदारों में से एक ठाकुर रणजीत सिंह जू के बारे में कहावत है कि वो स्वभाव से काफ़ी गुस्सेल, सख़्त किंतु अत्यंत न्यायप्रिय शासक थे। 

इलाके के चारण-भाट और लोग बतलाते हैं कि ठाकुर श्री रणजीत सिंह जू का जैसा नाम था वो थे भी वैसे ही शूरवीर तथा उस समय पूरे रायसेन तथा विदिशा जिले की पंचायत इन्हीं के छांव में इनके कचहरी में लगती थी। 

अपने शौर्यवान महान पूर्वजो ठाकुर श्री मर्दन सिंह जू, ठाकुर श्री मोती सिंह जू , ठाकुर श्री दलेल सिंह जू आदि की ही भाँति ये कीर्तिवान और दिलेर थे। 

गाँव के लोग बतलाते हैं कि ठाकुर श्री रणजीत सिंह जू को अपने शौर्यवान पूर्वजों तथा अपने यदुवंशी कुल का क्षत्रिय होने का बहोत गुमान और गर्व था, उनकी गर्दन हरमेशा शान से तनी रहती। 

ठाकुर साहब का विवाह नरसिंह गढ़ जागीरदारी के यदुवंशी ठाकुरों की सुपुत्री से बड़े लाव लश्कर में सम्पन्न हुआ था और कहा जाता है कि नरसिंह गढ़ वालों ने सहजाखेड़ी-रामगढ़ घराने की साख को देख भेंट स्वरूप तीन शाही घोड़ों से लदे स्वर्ण, हीरे, रत्न आदि प्रस्तुत किये थे। 

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लोग बतलाते हैं कि ठाकुर श्री रणजीत सिंह जू को अपनी शान में गुस्ताखी बिल्कुल नगवार थी।

ऐसा कहा जाता है कि इनके घोड़े के टापों की आवाज सुनकर ही गांव के सभी लोग चौक में इखट्टे हो जाते थे और अपनी तोजी (लगान) चुकाया करते । 

जो इस अनुशासन का पालन नहीं करता था तो उसे सभी के समक्ष दंडित किया करते थे।

 

 जब भी वे अपनी हवेली से घोड़े पर सज्ज होकर निकलते तो उनके घोड़ो की टापों की आवाज़ सुन गांव वाले इनके सम्मान में सर झुकाकर पलकें बिछाये इनके पीछे पीछे गाँव की सीमा तक चलते।। 

अगर किसी ने अकड़ दिखा इनकी शान में गुस्ताखी करने की हिमाकत की तो उन्हें ठाकुर साहब स्वयं अपने हंटर से दंडित करते पूरे गाँव वालों के समक्ष। 

इस वाक्ये से ये ज़रूर मालुम पड़ता है कि ठाकुर श्री रणजीत सिंह जू काफ़ी सख़्त थे लेकिन इसके साथ साथ वे एक न्यायप्रिय और अत्यंत अनुशासित और मज़बूत शासक थे।

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Special Thanks to: Kunwar Saheb Ravindra Singhji the present scion of Sehjakhedi-Ramgarh House. 

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हजारों साल नरगिस अपनी बे नूरी पर रोती है।
बडी मुश्किल से होता है चमन मे ठाकुर रणजीत जैसा दीदावर पैदा।

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By: श्री बलभद्र कुल अवंतस दाऊ यादव वंश खाप पंचायत समिति बुन्देलखण्ड

जय श्री कृष्णा 🙏🏻🙏🏻
जय दाऊ सरदार⚔️जय क्षात्र धर्म🚩
जय कुल गुरु श्री गर्गाचार्य महाराज की🙏🏻🙏🏻

✍️क्षत्रिय अंकित यदुवंशी & कुंवर पंकज प्रताप दाऊजू

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