पट्टन घराने के जंगबाज योद्धा ठाकुर फौजख़ान यदुवंशी
बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़
पट्टन घराने के जंगबाज योद्धा ठाकुर फौजख़ान यदुवंशी
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यदुकुल में एक से बढ़कर एक जांगबाज योद्धाओं और राजे रजवाड़ों ने जन्म लिया जिन्होंने मां भारती के स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया ।
आज जिन शूरमा की बात कर रहे हैं वे है बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा ( मधयप्रदेश) की धरती विदिशा के पट्टन के पुलैया गोत्रिय यदुवंशी क्षत्रिय घराने के वीर सपूत श्री श्री ठाकुर फौज़खान सिंह हैं जो ताउम्र हथियारबंद रहे।
इनके बारे में फिलहाल बहुत ज़्यादा जानकारी तो नहीं हमारे पास लेकिन इनके माध्यम से हम आज कई ऐतिहासिक चीज़ों पर प्रकाश डालेंगे।
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महाराजा प्रहलाद सिंह की वीर नस्ल पुलैया मध्य प्रदेश के शिवपुरी,विदिशा तक माइग्रेट कर गये और वहाँ पर कई जागीरों को स्थापित किया जिसमे सेमरी , खडोर, रामगढ़,थाना,नहरयाई,पट्टन, सहजाखेड़ी , दुनातर घराने आदि प्रमुख हैं।
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महाराजा प्रहलाद सिंह के पीढ़ी में जन्मे नहरयाई जागीरदारी घराने के उस समय के ज़ोरावर शासक राजा धुंधसाय सिंह।
राजा धुंधसाय सिंह तीन भाई थे।
इन्हीं के सबसे छोटे भ्राता थे दिलेर और जंगबाज ठाकुर श्री फ़ौजख़ान।
ये ताउम्र अपने ज्येष्ठ भ्राता और राजा के प्रति निष्ठावान रहते हुए दुश्मनों से लोहा लेते रहे।
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आप ज़रूर सोच रहें होंगे कि ये कैसा नाम है " ठाकुर फ़ौजखान "।
आप यहीं सोच रहें होंगे कि इनके नाम के आगे "ख़ान" क्यों लगा है, क्या है इसका अर्थ?
क्यूंकि ख़ान शब्द सुनते ही लोगों के दिमाग़ में पठान लड़ाकों का चित्र दिमाग में आ जाता है।
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तो अाइए आज थोड़ा सा प्रकाश "ख़ान" पदवी पर डालते हैं।
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दरअसल ये जो " ख़ान" शब्द है असल मे इसका जन्म संस्कृत के शब्द से ही हुआ है जो बाद में तुर्की भाषा के ख़ान में तब्दील हुआ जिसका शाब्दिक अर्थ होता है शूरवीर, कुल, कुनबे या सूबे का सरदार।
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ख़ान पदवी का सर्वप्रथम उपयोग मंगोल सम्राट चंगेज खान ने की थी।
चंगेज ख़ान कहीं से भी मुस्लिम नहीं था आपको बता दें जानकारी के लिए।
चंगेज ख़ान से जुड़ी एक और बात शायद आप लोग नहीं जानते होंगे कि चंगेज ख़ान मंगोल का शासक ज़रूर था लेकिन वो मंगोल नस्ल का भी नहीं था।
इतिहास के अनुसार चंगेज खान के चार पीढ़ी पीछे के पूर्वज का नाम राजा चकीतो था जो हिंदु यादवों के वंश से था।
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अब बात करें ठाकुर श्री फ़ौजख़ान जी की तो ये रणकौशल में बहुत ही पारंगत थे इसलिए उन्हें खान ' यानी ' बहादुर सरदार ' कहा जाता था। इनके वीरता के किस्से आज भी सुनाये जाते हैं
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Post by :श्री बलभद्र कुल अवंतस दाऊ यादव वंश खाप पंचायत समिति बुन्देलखण्ड
सत्य सनातन धर्म की जय।
जय मां विंध्यवासिनी
जय श्री कुल गुरु गर्गाचार्य
जय श्री कृष्णा
जय श्री बलराम
✍️क्षत्रिय अंकित यदुवंशी "दाऊ साहब"
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