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बजरंगगढ़ का दुर्ग किला महाराजा जय नारायण सिंह यादव

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ _______________________________ बजरंग गढ़ का किला जहां आज भी मौजूद है अनमोल पारस पत्थर:  (यदुवंशियों और अग्निवंशियो के रक्तरंजित इतिहास का साक्षी)   --------------------------------------- दुर्गो की धरा कहे जाने वाले बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा (मध्यप्रदेश) के प्रसिद्ध दुर्गों में से एक है बजरंगगढ़ का दुर्ग । गुना जिले में मौजूद बजरंग गढ़ का निर्माण 15 से 16वीं सदि के मध्य गगरोन रियासत के यदुवंशी क्षत्रिय शासक महाराजा जय नारायण सिंह ने अपने शासन के दौरान करवाया था। गगरोन राजवंश का गोत्र बैरगनिया है। ---------- बैरगानिया गोत्र अलवर, जयपुर से माइग्रेट कर मथुरा और फिर मध्यप्रदेश के गुना जिले में आए और 300 गाँव की रियासत स्थापित करी। ---------------- महाराजा जय नारायण सिंह ने यहां शासन के दौरान बजरंगगढ़ किले में तोपखाना , रंग महल , मोती महल का निर्माण किया।  साथ ही महाराजा ने यहां अपने कुलदेवता भगवान श्री कृष्ण का मंदिर, अपने राजवंश के रक्षक बजरंग बली का मंदिर तथा अपनी कुलदेवी माँ बीसभुजा माता के मंदिर का निर्मा...

यदुवंशी क्षत्रपों- राणाओं द्वारा स्थापित अहिरवाड़ा राज्य (बुन्देलखण्ड):- राणा रुद्रमूर्ति द्वारा स्थापित

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यदुवंशी क्षत्रपों- राणाओं द्वारा स्थापित अहिरावड़ा राज्य (बुन्देलखण्ड):- अहिरवाड़ा मध्य भारत या आधुनिक मध्य प्रदेश में पार्वती और बेतवा नदियों के बीच स्थित एक ऐतिहासिक क्षेत्र है। अहिरवाड़ा राज्य भिलसा और झांसी शहरों के बीच स्थित था। यदुवंशी आभीर क्षत्रप( यादव)अक्सर सौराष्ट्र के क्षत्रप शिलालेख में उल्लेखित होते रहे हैं जिनहोंने मथुरा, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक समेत समस्त भारत पर राज किया था। बाद की तारीख में इन्होंने बुन्देलखण्ड मध्य प्रदेश में अहिरवाड़ा की नींव रखी।  औरंगजेब के शासनकाल में, अहिरवाड़ा कुछ समय के लिए खींची राजपूत वंश के राजा धीरज सिंह के शासन के अधीन आ गया, जो ज्यादातर समय के लिए यदुवंशी आक्रमण को रोकने में ही व्यस्त रहा। ऐतिहासिक रूप से, बाटक नगर (अहरोरा) व अहिरवाड़ा यदुवंशी राणाओं द्वारा स्थापित किए गए थे। राजा राणा रुद्रमूर्ति सिंह अभीर यहाँ के राजा हुआ करते थे तथा उसके बाद माधुरीपुत्र, ईश्वरसेन व शिवदत्त आदि मशहूर अभीर राजा हुये इनमें से कुछ कालांतर में राजपूत जाति में मिलते गए। ________________________________________________ राजा पूरन...

राजा चूरामन सिंह यदुवंशी

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ______________________________ राजा चूरामन सिंह यदुवंशी -------------------------------- राजा चुरामन सिंह अभिर गोंड गैरीसन के एक कमांडर थे जो बाद में आधुनिक बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा ( मध्य प्रदेश )के जबलपुर जिले में कैमोर के पास 22 गाँवों के एक रियासत स्थापित की और राजा की उपाधि भी धारण की। यह संपत्ति उन्हें गढ़ मंडला के राजा नारिन सा द्वारा सोपी गई थी। नरेंद्र शाह (नारिन सा) के गोंड शासन के दौरान, कटंगी एक सेना की चौकी थी, जहाँ चुरामन सिंह सेनापति थे। चुरामन सिंह की वीरता देख उन्हें जबलपुर में कैमोर के पास 22 गाँव दिए गए थे। 1722 में चूरामन ने अपने बेटे हमीर देव सिंह को यहां का राजा स्थापित किया। बाद में, देवरी (सागर) तक के क्षेत्र चूरामन सिंह के प्रभाव में आ गए, जिस पर उन्होंने 1731 तक शासन किया।  नरेंद्र शाह ने 1731 में राजा चूरामन से देवरी को वापस देने की मांग भी की थी। By: श्री बलभद्र कुल अवंतस दाऊ यादव वंश खाप पंचायत समिति बुन्देलखण्ड जय मां भवानी जय श्री कुल गुरु गर्गाचार्य जय श्री कृष्णा जय श्री बलराम ✍️क्षत्रिय अंकित ...

यदुवंशी वीरांगना कमलावती और विमलावती

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ____________________________________ यदुवंशी वीरांगना राजकुमारी कमलावती और विमलावती का अमर बलिदान। ------------------------------------------ भारतवर्ष को अखंड बनाने में जितना योगदान क्षत्रियों का है उतना ही योगदान क्षत्राणियों का है जिन्होंने समय समय पर अपना बलिदान दे वीरता के उदाहरण पेश किए। आज जिन दो क्षत्राणियों का इतिहास बताने वाले हैं वो दोनो यदुवंशी घराने की क्षत्राणियां हैं जिन्होंने अपने शीश काट दिए लेकिन अपने क्षत्रिय कुल को लज्जीत न होने दिया। ---------------------------------- मध्यप्रदेश में स्थित है मथुरा के शासक महाराजा प्रह्लाद सिंह यदुवंशी की वीर नस्ल पुलईया गोत्रीय यदुवंशी ठाकुरों का प्रतिष्ठित पट्टन राजघराना । ****** ------------------------- महाराजा प्रहलाद सिंह ने मथुरा एवं पूर्वी राजपुताना में बसे सगोत्रीय भाईबंदों के संग आकर मथूरा के पास गढ प्रहलादखेड़ा की नींव रखी और वहां पर एक किले का निर्माण करवाया। इसके पश्चात महाराजा प्रहलाद सिंह की वीर नस्ल पुलैया बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा ( मध्य प्रदेश) के शि...

तिलैथा स्टेट ( जागीर ) झांसी जिला उत्तर प्रदेश में स्थित है - राजा ठाकुर श्री हरप्रसाद सिंह दाऊजू( १८८१-१९४२)

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ____________________________________ बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा क्षेत्र में भगवान बलराम जी के वंशजो के बहुत से गोत्रो के घराने ओर ठिकाने आवाद है उनमें से ही एक ठिकाना है पचैरया गोत्र का तिलैथा का घराना। पचैरया गोत्र का निकास मथुरा से भगवान बलदाऊ महाराज के एक पुत्र से है । //////////////////////////////// मथुरा से बिस्थापित होकर राजस्थान के रास्ते मालवा होते हुए इस क्षेत्र में आकर पचेरिया घराने के पूर्वजों ने तलवार की धाक पर इस क्षेत्र पर जागीर स्थापित की ओर इस क्षेत्र पर शासन किया। तिलैथा स्टेट ( जागीर ) झांसी जिला उत्तर प्रदेश में स्थित है ---------------------------------------------- तिलैथा स्टेट एक छोटी परन्तु एक सम्पन्न और प्रतिष्ठित जागीर (रियासत) रही है देश आजाद होने के बाद भी इस राजघराने की प्रसिद्धि पूरे सूबे में ख्यात है और आज भी इस राजघराने को वहां के लोग आज भी अपना राजा मानते हैं। ___________________________________ इस घराने के एक बहुत ही प्रसिद्ध शासक रहे हैं जिन्होंने अपन...

यदुकुल चंद्र सवाईं महाराज दाऊ श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जूदेव:

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बुन्देलखण्ड अहिरवाड़ा यदुवंशी क्षत्रपों का गढ़ ____________________________________ यदुकुल चंद्र सवाईं महाराज दाऊ श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जूदेव: तस्वीर में आप हैं बलदाऊ वंशी यादव क्षत्रियों की प्रमुख गद्दी बुंदेलखंड के प्रतिष्ठित नैगुवा रेबई प्रिंसली स्टेट के स्वर्गीय महाराजा सवाईं बहादुर विश्वानाथ प्रताप सिंह जूदेव।  1839 में पितामहाराज सवाई महाराजा जगत सिंह जूदेव के बैकुंठ सिधारने के पश्चात आपकी माताश्री और "बुंदेलखंड की रजिया सुल्ताना" महारानी ठकुराइन दुलैया बाई ने 12 वर्षों तक एक कुशल प्रशासिका के तौर पर राजघराने की सत्ता संभाली । तदपश्चात 1851 में आपको रियासत के सरदारों, रियाया और पुरोहितों की मौजूदगी में नैगुवा राजगद्दी पर नशीन किया गया। पूर्वजों से विरासत में मिली बहादुरी और निष्ठा से आपने शासन किया और एक जनप्रिय शासक सिद्ध हुए।  सूबे में काफी कार्य करवाया जिसके लिए आप आज भी जनमानस में याद किए जाते हैं।  आपके पश्चात आपके सुपुत्र और युवराज, सवाई महाराजा रतन सिंह जूदेव यहां के शासक हुए।   Warm Regards to : Naiguwan Royal Family and Kunwar Rajat Si...